मां नंदा सुनंदा महोत्सव में सांस्कृतिक आयोजनों की धूम है।
ऐपण एवं उत्तराखंडी व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन।
चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को भी किया गया सम्मानित, विद्यार्थियों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
रिपोर्ट — बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। मां नंदा-सुनंदा महोत्सव के तहत सोमवार को विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। महोत्सव में पारंपरिक ऐपण कला, उत्तराखंडी व्यंजनों और चित्रकला प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं के दौरान पारंपरिक संस्कृति और स्थानीय कला की आकर्षक झलक देखने को मिली।
महोत्सव के अंतर्गत आयोजित पारंपरिक ऐपण प्रतियोगिता के विद्यार्थी वर्ग में मिशन इंटर कॉलेज की कामिनी बेलवाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय आदर्श बालिका इंटर कॉलेज की हर्षिता पांडे द्वितीय तथा मानसी रावत तृतीय स्थान पर रहीं। महिला वर्ग की ऐपण प्रतियोगिता में कमला जोशी ने प्रथम, प्रीति बवाड़ी ने द्वितीय और सीमा भाकुनी ने तृतीय स्थान हासिल किया।
उत्तराखंडी व्यंजन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों की विविधता और स्वाद का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में नीमा बेलवाल ने प्रथम, नैना कांडपाल ने द्वितीय और लीला नयाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। अर्चना सती को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं रीतु, खष्टी, इंदू और विजेता को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
महोत्सव के दौरान आयोजित अंतरविद्यालयी चित्रकला प्रतियोगिता के परिणाम भी घोषित किए गए। सब-जूनियर वर्ग में एपीएस के रिधान ने प्रथम, एपीएस की गर्विता बवाड़ी ने द्वितीय और कैंट प्राइमरी स्कूल की तरूना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
जूनियर वर्ग में केवी की संध्या प्रथम, एपीएस की कुमुद बिष्ट द्वितीय और केवी के पारस मेहरा तृतीय स्थान पर रहे। सीनियर वर्ग में गौरव कोटल्या ने प्रथम, एपीएस के देबव्रत ने द्वितीय तथा राजकीय आदर्श बालिका इंटर कॉलेज की उपासना ने तृतीय स्थान हासिल किया।
प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका डॉ. रजनी भट्ट, मीना साह, शोभा पंत, नेहा माहरा और ज्योति साह ने निभाई। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की कला, प्रस्तुति, रचनात्मकता और पारंपरिक शैली के आधार पर मूल्यांकन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य प्रदीप कुमार रहे। उन्होंने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किए। समिति पदाधिकारियों ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को उत्तराखंड की लोककला, संस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक खान-पान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महोत्सव में आयोजित इन प्रतियोगिताओं को लेकर प्रतिभागियों और दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला। ऐपण की पारंपरिक कला, पहाड़ी व्यंजनों और विद्यार्थियों की चित्रकला ने महोत्सव की सांस्कृतिक छटा को और समृद्ध किया।





