रानीखेत के टाना-पन्याली में लघु दुग्ध डेयरी का शुभारंभ, करन माहरा बोले—ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने में ऐसी पहल अहम

गांधी जयंती पर टाना-पन्याली में लघु दुग्ध डेयरी का शुभारंभ।

रिपोर्ट– बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर ग्राम सभा टाना-पन्याली में लघु दुग्ध डेयरी का शुभारंभ किया गया। डेयरी का उद्घाटन पूर्व विधायक रानीखेत, पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड कांग्रेस एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा ने किया। इस अवसर पर ग्राम सभा टाना-पन्याली के ग्रामीणों के साथ ग्राम सभा तस्वाड़ के ग्राम प्रधान आनंद सिंह सहित क्षेत्र के लोग मौजूद रहे।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए करन माहरा ने लघु दुग्ध डेयरी की शुरुआत को ग्रामीणों के लिए रोजगार और स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस प्रकार की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना जरूरी है।
करन माहरा ने डेयरी की शुरुआत का श्रेय क्षेत्र पंचायत सदस्य सरोली नीरज सिंह मेहरा की पहल और प्रयासों को देते हुए उनके कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सहभागिता से शुरू किए गए ऐसे प्रयास न केवल पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं, बल्कि गांवों से पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने नीरज सिंह मेहरा और ग्रामीणों से भविष्य में भी जनहित से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही डेयरी संचालन में स्थानीय पशुपालकों और ग्रामीणों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
वहीं, क्षेत्र पंचायत सदस्य नीरज सिंह मेहरा ने कहा कि ग्रामीणों के सहयोग से अपने गांव में शुरू हुई लघु दुग्ध डेयरी का उद्घाटन करन माहरा के हाथों होना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि डेयरी के माध्यम से स्थानीय पशुपालकों को अपने दुग्ध उत्पादन के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे और इससे ग्रामीणों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नीरज सिंह मेहरा ने कहा कि ग्रामीणों के सहयोग और सहभागिता से शुरू की गई इस पहल को आगे भी विस्तार देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने डेयरी की स्थापना में सहयोग करने वाले सभी ग्रामवासियों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने भी दुग्ध उत्पादन एवं पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ही आजीविका के अवसर उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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