यूएनईपी टीईईबी एग्रीफूड परियोजना के तहत 50 किसानों को 800 किलो बीज वितरित, मृदा स्वास्थ्य सुधार और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने पर जोर
हरिद्वार। सतत और जैविक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (आईआईएफएसआर), मोदीपुरम के वैज्ञानिकों ने हरिद्वार जनपद के रुड़की क्षेत्र में ढैंचा बीज वितरण अभियान आयोजित किया। यह क्षेत्र यूएनईपी टीईईबी एग्रीफूड परियोजना के प्रमुख अध्ययन क्षेत्रों में शामिल है।
अभियान का उद्देश्य किसानों को हरित खाद आधारित पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना था। कार्यक्रम के दौरान 50 किसानों को लगभग 800 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले ढैंचा बीज वितरित किए गए।
वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि ढैंचा एक तेजी से बढ़ने वाली दलहनी फसल है, जो भूमि में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर मृदा की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होती है। इससे रासायनिक खाद की आवश्यकता कम होती है और मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।
आईआईएफएसआर के वैज्ञानिकों के अनुसार यह पहल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच ऐसी जैविक और किफायती कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो जैव विविधता संरक्षण और पुनर्योजी कृषि (रेजेनरेटिव एग्रीकल्चर) को मजबूती प्रदान करती हैं।
यूएनईपी टीईईबी एग्रीफूड परियोजना कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के आर्थिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है।
परियोजना के तहत किए जा रहे ऐसे नवाचारपूर्ण प्रयास भारतीय कृषि को हरित और सतत भविष्य की ओर अग्रसर करने में सहायक साबित हो रहे हैं।

