हल्द्वानी : जिया रानी की भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर पहाड़ी समाज में आक्रोश, निकाली ‘पहाड़ी स्वाभिमान रैली’; प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम

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रानीबाग की ऐतिहासिक धरोहर को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग, सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन; कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

हल्द्वानी। रानीबाग स्थित माता जिया रानी की ऐतिहासिक एवं धार्मिक भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग को लेकर रविवार को पहाड़ी समाज ने जोरदार प्रदर्शन किया। पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत के नेतृत्व में आयोजित ‘पहाड़ी स्वाभिमान रैली’ में बड़ी संख्या में पहाड़ी समाज के लोग, महिलाएं और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिया रानी की भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग उठाई।

रैली की शुरुआत उत्थान मंच, हीरानगर स्थित गोल्ज्यू मंदिर से हुई। यहां से प्रदर्शनकारी पैदल मार्च करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। रैली में कुमाऊंनी ढोल-नगाड़ों की गूंज और माता जिया रानी के जयकारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक वेशभूषा में भी रैली में शामिल हुए।

प्रदर्शन में प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत, पूर्व राज्यमंत्री एवं प्रमुख राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु, डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक देवेंद्र सिंह खाती सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे।

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का हवाला

पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि रानीबाग स्थित चित्रेश्वर धाम और जिया रानी की भूमि का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र कत्युरी राजाओं के वैभवशाली एवं शक्तिशाली साम्राज्य की ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, माता जिया रानी से जुड़ी यह भूमि स्थानीय समाज की आस्था और इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र है तथा इसे किसी भी स्थिति में कथित अतिक्रमण के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता।

उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को मामले में समय रहते प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। यदि जल्द भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से जिया रानी की भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग करते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शनि मंदिर को लेकर भी उठी आपत्ति

मंदिर समिति से जुड़े रमेश मनराल और चंदन सिंह मनराल ने कहा कि चित्रेश्वर धाम, चित्रशिलाघाट और रानीबाग का क्षेत्र ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पहाड़ी संस्कृति एवं सनातन परंपराओं के अनुरूप व्यवस्थाओं के विपरीत शनि मंदिर का निर्माण कराया गया है। उन्होंने मंदिर को वहां से अन्यत्र स्थापित करने की मांग भी प्रशासन के समक्ष रखी।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों की रक्षा के लिए पहाड़ी समाज अब लामबंद हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से जिया रानी की तपस्थली सहित संबंधित भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर कथित अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।

सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

रैली सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में रानीबाग स्थित जिया रानी की भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने, ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा रानीबाग क्षेत्र को मानसखंड मंदिर माला के तहत धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की मांग की गई।

ज्ञापन में प्रशासन को 10 दिन के भीतर कथित अतिक्रमण के संबंध में कार्रवाई करने का अल्टीमेटम भी दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं हुई तो पहाड़ी समाज आंदोलन को और व्यापक करेगा।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो बड़ी संख्या में लोग आगे की रणनीति तय करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी सामाजिक स्थिति के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा। हालांकि, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी विवाद से बचने के लिए मामले में प्रशासन से नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी की गई।

‘जिया रानी की भूमि की रक्षा के लिए जारी रहेगा संघर्ष’

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिया रानी से जुड़ी भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि कुमाऊं की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। इसलिए इसकी सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ समाज की भी है।

उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक व्यापक किया जाएगा।

इस दौरान चित्रांगद रावत, पहाड़ी आर्मी के जिला अध्यक्ष राजेंद्र कांडपाल, प्रेमा मेर, कविता जीना, राजेंद्र सिंह मनराल, चंदन सिंह मनराल, दिलीप कुमार चंद, विनोद कुमार जोशी, कमल जोशी, जय रावत, देवेंद्र सिंह खाती, सीता रावत, हरेंद्र सिंह राणा, गीता बिष्ट, महेश चंद्र भट्ट, रमेश मनराल, उमा रौतेला, अंजू पांडे, रमेश सिंह रावत, आनंद सिंह कन्याल, विनोद सिंह नेगी, कमल जेठी, मोहन सिंह बोरा, सुजान सिंह दसौनी, प्रदीप रौतेला, कन्नू तिवारी, राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र बिष्ट, मनोज सिंह रावत, दीपा बोरा, दीपा पांडे, दीपा मिश्रा, लाल सिंह रावत सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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