तुला सिंह तड़ियाल की पुस्तक ‘संघर्षों भरा सफर’ का भव्य विमोचन, जन आंदोलनों के इतिहास को सहेजने का प्रयास

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उत्तराखंड के सामाजिक और राज्य आंदोलन के संघर्षों को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करती है पुस्तक, विमोचन समारोह में जुटे जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी और समाजसेवी

रिपोर्टर : बलवंत सिंह रावत 

रानीखेत। उत्तराखंड के जन आंदोलनों, सामाजिक संघर्षों और जनसरोकारों के इतिहास को शब्दों में संजोने वाली तुला सिंह तड़ियाल की बहुचर्चित पुस्तक ‘संघर्षों भरा सफर (जन आंदोलनों का दस्तावेज)’ का भव्य विमोचन किया गया। पुस्तक का अनावरण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिवान सिंह नेगी ने किया। इस दौरान वक्ताओं ने पुस्तक को उत्तराखंड के विभिन्न जन आंदोलनों और संघर्षों के इतिहास को सहेजने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।

विमोचन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि ‘संघर्षों भरा सफर’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि उन जन संघर्षों की कहानी है, जिनमें आम जनता ने अपने अधिकारों, संसाधनों और क्षेत्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुस्तक में क्षेत्र में समय-समय पर हुए प्रमुख जन आंदोलनों, सामाजिक सरोकारों और जनता के योगदान को प्रामाणिक रूप से सामने रखने का प्रयास किया गया है। वक्ताओं के अनुसार यह दस्तावेज आने वाली पीढ़ियों को उत्तराखंड के संघर्षों और आंदोलनों की पृष्ठभूमि को समझने में मदद करेगा।

जन आंदोलनों के इतिहास को सहेजने की पहल

मुख्य अतिथि दिवान सिंह नेगी ने पुस्तक के विमोचन के अवसर पर लेखक तुला सिंह तड़ियाल को बधाई देते हुए कहा कि सामाजिक आंदोलनों और जन संघर्षों का इतिहास आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचना बेहद जरूरी है। ऐसे प्रयासों से समाज के संघर्षशील दौर, लोगों की भागीदारी और आंदोलनों के उद्देश्यों को समझने में मदद मिलती है।

समारोह में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण की लड़ाई लंबे सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों का परिणाम रही है। इन आंदोलनों में ग्रामीण क्षेत्रों की जनता, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुस्तक में इन्हीं संघर्षों और अनुभवों को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

सामाजिक और राजनीतिक जीवन में लंबे समय से सक्रिय हैं तुला सिंह तड़ियाल

लेखक तुला सिंह तड़ियाल का जन्म 09 अगस्त 1958 को ग्राम द्यौना, पोस्ट जमोली, तहसील भिकियासैंण, जनपद अल्मोड़ा में माता स्व. श्रीमती कौशल्या देवी और पिता स्व. श्री बाग सिंह तड़ियाल के घर हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने विनायक इंटर कॉलेज, विनायक से इंटरमीडिएट तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से स्नातक और स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की।

शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1978 में वे ग्राम सभा द्यौना के पंच बने। वर्ष 1988 में वे ग्राम सभा द्यौना के निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने गए। वर्ष 1996 में उन्होंने क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसी दौरान उन्होंने क्षेत्र पंचायत सदस्य पद से त्यागपत्र देकर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुए।

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली विधानसभा के चुनाव में उन्होंने वर्ष 2002 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने उत्तराखंड क्रांति दल के टिकट पर विधानसभा चुनाव में भाग लिया।

नशे और पानी के खिलाफ आंदोलनों में निभाई सक्रिय भूमिका

तुला सिंह तड़ियाल लंबे समय से अपने गांव द्यौना में रहकर सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़कर उन्होंने विभिन्न जन आंदोलनों में भागीदारी की। वर्ष 1984 में उन्होंने नशे के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि वर्ष 1985 में क्षेत्र के पानी से जुड़े जन आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भागीदारी की।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी तुला सिंह तड़ियाल सक्रिय रहे। वे आंदोलन के दौरान चर्चित ‘टाइगर फोर्स’ के संस्थापक रहे। राज्य आंदोलन से जुड़े उनके अनुभवों और उस दौर के संघर्षों को भी पुस्तक में स्थान दिया गया है।

वर्तमान में वे मानिला मंदिर, कमराड़ समिति के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सामाजिक भूमिका निभा रहे हैं।

विमोचन समारोह में जुटे क्षेत्र के गणमान्य लोग

पुस्तक विमोचन समारोह में क्षेत्र के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, पूर्व जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। सभी ने लेखक तुला सिंह तड़ियाल को पुस्तक के प्रकाशन और जन आंदोलनों के इतिहास को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर पूर्व जिला अध्यक्ष दीप भगत, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कांता रावत, पूर्व ब्लॉक प्रमुख भगवती रिखाड़ी, पूर्व प्रधानाचार्य कुबेर सिंह अधिकारी, प्रोफेसर डॉ. एन.डी. कांडपाल, डॉ. जया कांडपाल, बसंती अधिकारी, श्याम सिंह अधिकारी, पूरन सिंह, मदन कठायत सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनता उपस्थित रही।

समारोह के अंत में उपस्थित लोगों ने उम्मीद जताई कि ‘संघर्षों भरा सफर’ उत्तराखंड के सामाजिक एवं जन आंदोलनों के इतिहास को समझने वाले पाठकों, शोधार्थियों और नई पीढ़ी के लिए उपयोगी साबित होगी।

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