छायादार एवं फलदार पौधे रोपे गए, छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
रिपोर्टर: बलवंत सिंह रावत
रानीखेत। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से स्वर्गीय श्री जय दत्त वैला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत में गुरुवार को व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। महाविद्यालय के नवीन स्नातकोत्तर (पीजी) भवन परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छायादार, फलदार एवं पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपकर हरित परिसर निर्माण का संकल्प दोहराया गया।
यह अभियान विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, उत्तराखण्ड प्रांत के पौधारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम के लिए पर्यावरण प्रकोष्ठ, हल्द्वानी के पर्यावरणविद् एवं पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत तथा वन विभाग के पूर्व एसडीओ महेश तिवारी द्वारा निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए गए। महाविद्यालय के पर्यावरण प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का संयोजन डॉ. प्राची जोशी ने किया। इस अवसर पर गोदावरी फाउंडेशन सहित विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षिक संस्थाओं का भी सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में अंग्रेजी विषय की स्नातकोत्तर छात्राओं सहित महाविद्यालय के अन्य छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। प्रतिभागियों ने वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पाण्डेय ने कहा कि वृक्षारोपण केवल औपचारिक गतिविधि नहीं, बल्कि हमारी अकादमिक, सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम में डॉ. प्राची जोशी, डॉ. पारुल भारद्वाज, डॉ. सत्यमित्र सिंह, डॉ. निधि पाण्डेय, डॉ. हिमानी बिष्ट, कृपाल नेगी, श्री उपाध्याय, किशोर तथा दिग्विजय भंडारी सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। वहीं राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), एनसीसी, रोवर्स एवं रेंजर्स के स्वयंसेवकों और कैडेट्स ने पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का भी संकल्प लिया।
महाविद्यालय प्रशासन ने कहा कि यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरणीय चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करने की सतत पहल है, जिसे भविष्य में भी निरंतर जारी रखा जाएगा।


