जनक नंदनी के स्वयंबर और लक्ष्मण परशुराम संवाद देखने उमड़ पड़ा जन सैलाब
रानीखेत/भिकियासैंण। ककलासो क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज जीनापानी में आयोजित बाईस गांवों की संयुक्त रामलीला के तीसरे दिन सीता स्वयंवर और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का प्रभावशाली मंचन हुआ। आकर्षक प्रस्तुतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक रामलीला पांडाल पहुंचे।
रामलीला कमेटी ककलासो के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ समाजसेवी गौरी दत्त जोशी, एसएसबी के सेवानिवृत्त सेनानायक एवं स्वयंसेवक दीप पांडे तथा विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष नवल पांडे ने पूज्य गंधर्व गिरी महाराज के सानिध्य में दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मंचन के दौरान ककलासो क्षेत्र के दनपोला से पनपोला तक के 16 राजाओं ने सीता स्वयंवर में भाग लिया, लेकिन कोई भी भगवान शिव का धनुष उठाने में सफल नहीं हो सका। इसके बाद भगवान राम की भूमिका निभा रहे हर्षित गड़ाकोटी ने गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसका भंजन किया और माता सीता के साथ स्वयंवर संपन्न हुआ।
धनुष भंग होते ही परशुराम की भूमिका निभा रहे चंद्रशेखर तिवाड़ी शंखध्वनि के साथ जनक दरबार पहुंचे। यहां लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे ईश्वर असवाल और परशुराम के बीच हुए ओजपूर्ण संवाद ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं राजा जनक की भूमिका में प्रताप गड़ाकोटी ने सीता सहित अपनी चारों पुत्रियों का विवाह राजा दशरथ के चारों पुत्रों से संपन्न कराया।
पूज्य गंधर्व गिरी महाराज ने एक माह तक सभी कलाकारों को प्रशिक्षण देकर मंचन के लिए तैयार किया। रामलीला के सफल आयोजन में ललित बिष्ट, वीरेंद्र बिष्ट, गोधन सिंह असवाल, सुरेंद्र गड़ाकोटी, आनंद रावत, महिपाल सिंह गड़ाकोटी, दर्शन असवाल, गणेश शर्मा, दीपक कड़ाकोटी, लक्ष्मण राम, मनोहर गड़ाकोटी, देवेंद्र मावड़ी, ललित गड़ाकोटी और बलवंत मनराल सहित अनेक रामसेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम का संयुक्त संचालन क्षेत्र पंचायत सदस्य दीपक करगेती और रामलीला कमेटी अध्यक्ष संजय गड़ाकोटी ने किया।
