रानीखेत। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत की मेधावी शोध छात्रा कुमारी सोनिया ने 25 फरवरी 2026 को डी.एस.बी. परिसर, नैनीताल में आयोजित पीएचडी फाइनल वाइवा परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता प्राप्त की।
उनका शोध विषय “कुमाऊँ के टी.बी. सेनेटोरियम का ऐतिहासिक अध्ययन” रहा, जो कुमाऊँ क्षेत्र के चिकित्सा इतिहास पर आधारित एक महत्वपूर्ण और अनूठा शोध कार्य है।
शोध में भवाली टी.बी. सेनेटोरियम की स्थापना (1912) से लेकर उसके ऐतिहासिक, सामाजिक और चिकित्सीय महत्व का विस्तृत अध्ययन किया गया है।
ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में स्थापित यह संस्थान एशिया के सबसे बड़े क्षय रोग (टी.बी.) उपचार केंद्रों में से एक रहा है।
शोध में ‘ओपन-एयर थेरेपी’ पद्धति पर विशेष प्रकाश डाला गया है, जिसमें हिमालय की शुद्ध वायु, सूर्य प्रकाश और प्राकृतिक वातावरण के माध्यम से रोगियों का उपचार किया जाता था।
यह शोध न केवल उत्तराखंड के चिकित्सा इतिहास को समृद्ध करता है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण, स्वास्थ्य पर्यटन और ऐतिहासिक संरक्षण नीतियों के लिए भी मार्गदर्शक दस्तावेज सिद्ध होगा।
इस शोध कार्य का निर्देशन डॉ. पंकज प्रियदर्शी, सहायक प्रोफेसर, इतिहास विभाग, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत द्वारा किया गया। वाइवा परीक्षा के बाह्य परीक्षक प्रो. अमित कुमार सुमन (किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) रहे।
वाइवा के दौरान इतिहास विभाग के समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. संजय घिल्डियाल सहित प्रो. संजय टम्टा, डॉ. रितेश साह, डॉ. शिवानी रावत, डॉ. मनोज बाफिला, डॉ. शिवराज कपकोटी तथा अन्य शोधार्थी उपस्थित रहे।
इस उपलब्धि पर महाविद्यालय परिवार ने शोध छात्रा और उनके शोध निर्देशक का भव्य स्वागत किया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे ने कहा कि कुमारी सोनिया का यह शोध कुमाऊँ के चिकित्सा इतिहास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कार्य है और यह महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है।
महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण ने शोध छात्रा एवं शोध निर्देशक को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।




















