ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए, बेटी-दामाद और नाती भी अमेरिकी हमले में मरे, 40 दिनों के शोक का ऐलान

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मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। प्रेस टीवी ने इसे “शहादत” बताया है। चैनल पर एक महिला एंकर ने भावुक होकर उनके निधन की घोषणा की।

दावे के मुताबिक, सुप्रीम लीडर के मारे जाने के बाद ईरान में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और 7 दिनों की सरकारी छुट्टियों का ऐलान किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले के वक्त खामेनेई अपने घर स्थित दफ्तर में मौजूद थे। इससे पहले उनकी बेटी-दामाद, नाती और ईरानी रक्षा मंत्री के मारे जाने की खबरें भी सामने आ चुकी थीं।

कई घंटों तक खामेनेई की हालत को लेकर विरोधाभासी सूचनाएं आती रहीं। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से भी मौत की पुष्टि के बयान आए थे, हालांकि तब कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। अब ईरानी सरकारी मीडिया ने स्पष्ट रूप से उनके मारे जाने का दावा किया है। प्रेस टीवी, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) का एक प्रभाग है।

इस बीच इराक के प्रमुख शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल सद्र ने खामेनेई की मौत पर शोक जताने का दावा करते हुए इराक में तीन दिन के सार्वजनिक मातम की घोषणा की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार शनिवार सुबह अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई शहरों पर हमले किए। राजधानी तेहरान में खामेनेई के दफ्तर और रिहायशी परिसर के आसपास बमबारी की खबरें आईं। इजरायली मीडिया में दावा किया गया कि उनके कंपाउंड पर कई बम गिरे और सैटेलाइट तस्वीरों में परिसर को भारी नुकसान दिखा।

हमलों के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए खामेनेई को “इतिहास के सबसे खतरनाक लोगों में से एक” बताया और ईरानी जनता से सरकार बदलने की बात कही। इस बयान को केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन की मंशा के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर थे। उनके 36 वर्षों के शासनकाल में अमेरिका से टकराव, परमाणु विवाद, कड़े प्रतिबंध, आंतरिक विरोध प्रदर्शन और हमास–हिज्बुल्लाह को समर्थन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

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