विकासखंड ताड़ीखेत के सभागार में विकासखंड स्तरीय वनाग्नि समिति, ग्राम स्तरीय वनाग्नि समितियों के अध्यक्षों (ग्राम प्रधानों), वन विभाग एवं पंचायतीराज विभाग के कार्मिकों की उपस्थिति में वनाग्नि चौपाल का आयोजन।
रिपोर्ट- बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। जिला स्तरीय वनाग्नि समिति अध्यक्ष एवं जिलाधिकारी अल्मोड़ा के निर्देशों के तहत विकासखंड ताड़ीखेत के सभागार में वनाग्नि चौपाल का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विकासखंड स्तरीय वनाग्नि समिति, ग्राम स्तरीय समितियों के अध्यक्ष (ग्राम प्रधान), वन विभाग और पंचायतीराज विभाग के कार्मिकों ने भाग लिया।
वनाग्नि चौपाल का मुख्य उद्देश्य आमजन को जंगलों में लगने वाली आग के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और इसके नियंत्रण में जनसहभागिता सुनिश्चित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान वनाग्नि से सूखते जल स्रोतों, जैव विविधता को हो रहे नुकसान, बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्य प्रशिक्षक गजेंद्र कुमार पाठक ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वनाग्नि के प्रभाव और इसके नियंत्रण के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने शीतलाखेत मॉडल का उदाहरण देते हुए स्थानीय स्तर पर सामुदायिक सहयोग से आग पर नियंत्रण की आवश्यकता बताई।
खंड विकास अधिकारी तारा चंद ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार सभी जनप्रतिनिधियों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकासखंड के 130 गांवों में तीन दिनों तक यह जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमें अधिकारी और कर्मचारी गांव-गांव जाकर गोष्ठियों के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे।
उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को जोड़कर वनों की सुरक्षा को जनआंदोलन का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में खंड विकास अधिकारी तारा चंद, ग्राम प्रधान, वन विभाग, पुलिस विभाग और पंचायतीराज विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।

